धमतरी/ Udanti Sitanadi Tiger Reserve में हाल ही में अत्यंत दुर्लभ एवं कम दिखाई देने वाले ट्राइकारिनेट हिल टर्टल की खोज ने एक बार फिर रिजर्व की समृद्ध जैव विविधता और बेहतर होती पारिस्थितिक स्थिति को उजागर किया है। वैज्ञानिक दृष्टि से यह खोज बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि यह कछुआ प्रजाति सामान्यतः हिमालय की तलहटी एवं पूर्वोत्तर भारत के पर्वतीय क्षेत्रों में पाई जाती है।
विशेषज्ञों के अनुसार ट्राइकारिनेट हिल टर्टल अपनी तीन धारियों वाली विशिष्ट कवच संरचना और अत्यंत गुप्त स्वभाव के लिए जाना जाता है। यह प्रजाति आर्द्र वन क्षेत्रों, बारहमासी जल स्रोतों एवं घने प्राकृतिक आवासों में निवास करती है। मध्य भारत में इसकी उपस्थिति इस बात का संकेत है कि USTR का वन पारितंत्र उच्च गुणवत्ता वाले एवं अविच्छिन्न प्राकृतिक आवासों को संरक्षित रखने में सफल हो रहा है।
वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार की खोजें उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व की छिपी हुई जैव विविधता क्षमता एवं उसके बढ़ते पारिस्थितिक महत्व को दर्शाती हैं। हाल के वर्षों में रिजर्व में कई अन्य दुर्लभ वन्यजीवों की उपस्थिति भी दर्ज की गई है, जिनमें मालाबार पाइड हॉर्नबिल, इंडियन जायंट फ्लाइंग स्क्विरल, इंडियन जायंट स्क्विरल तथा स्मूथ-कोटेड ऊदबिलाव प्रमुख हैं।

ये सभी प्रजातियाँ सुरक्षित वन आवास एवं न्यूनतम मानवीय हस्तक्षेप पर निर्भर रहती हैं। इससे स्पष्ट होता है कि USTR का पारिस्थितिक तंत्र लगातार पुनर्जीवित हो रहा है और वन्यजीवों के लिए सुरक्षित वातावरण उपलब्ध करा रहा है।
रिजर्व के उपनिदेशक Varun Jain ने बताया कि एंटी-पोचिंग तंत्र को सशक्त बनाने से संवेदनशील एवं संकटग्रस्त प्रजातियों के संरक्षण में उल्लेखनीय सफलता मिली है। पिछले चार वर्षों में विशेष एंटी-पोचिंग टीम द्वारा 80 से अधिक सफल अभियान चलाए गए हैं।

उन्होंने बताया कि सघन वन गश्त, ड्रोन आधारित निगरानी, AI आधारित मॉनिटरिंग सिस्टम तथा वन्यजीव अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई से अवैध गतिविधियों में भारी कमी आई है। साथ ही लगभग 956 हेक्टेयर क्षेत्र से अतिक्रमण हटाकर महत्वपूर्ण वन आवासों का पुनर्स्थापन किया गया है, जिससे पारिस्थितिक संपर्क और वन्यजीव सुरक्षा को मजबूती मिली है।
वन विभाग ने कहा कि इस प्रकार की दुर्लभ प्रजातियों की खोज वैज्ञानिक प्रबंधन एवं जनसहभागिता आधारित संरक्षण प्रयासों की आवश्यकता और महत्व को पुनः स्थापित करती है। रिजर्व प्रशासन ने स्थानीय समुदायों एवं वन्यजीव प्रेमियों से संवेदनशील वन आवासों के संरक्षण में सहयोग करने तथा वन्यजीवों को किसी भी प्रकार की बाधा न पहुँचाने की अपील की है।
लगातार दुर्लभ वन्यजीवों के दस्तावेजीकरण के चलते उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व अब मध्य भारत के प्रमुख जैव विविधता क्षेत्रों में अपनी एक नई पहचान बना रहा है। यह वन विभाग के समर्पित संरक्षण प्रयासों के सकारात्मक परिणामों को भी दर्शाता है।
