मुंबई नगर निगम ने शुक्रवार (8 अगस्त) को ‘नारली पूर्णिमा’ के अवसर पर अपने सभी स्कूलों और ऑफिस में छुट्टी का ऐलान किया है. हालांकि, बृहन्मुंबई नगर निगम ने कहा कि आवश्यक सेवाओं को इस आदेश से बाहर रखा गया है.
बीएमसी द्वारा जारी विज्ञप्ति में यह बताया गया है कि यह फैसला महाराष्ट्र सरकार द्वारा त्योहार के अवसर पर मुंबई में सरकारी और अर्ध-सरकारी कार्यालयों में सार्वजनिक अवकाश की घोषणा के बाद लिया गया है. इसके अनुसार, बीएमसी के स्कूल और गैर-ज़रूरी नगर निगम कार्यालय शुक्रवार को बंद रहेंगे. आवश्यक सेवाएं सामान्य रूप से चलती रहेंगी.
सावन के पावन महीने की पूर्णिमा को नारली पूर्णिमा के रूप में मनाया जाता है. इस पूर्णिमा पर देश भर में रक्षाबंधन का पर्व बड़ी धूम-धाम से मनाया जाता है. इसी दिन महाराष्ट्र और कोंकण क्षेत्र में समुद्र तट पर नारली पूर्णिमा की विशेष पूजा होती है. नारली पूर्णिमा की पूजा समुद्र और वरुण देव को समर्पित होती है.
मछुआरों के लिए बड़ा महत्व रखती है नारली पूर्णिमा
नारली पूर्णिमा को महाराष्ट्र के मछुआरे बड़े स्तर पर मनाते हैं. इसे मानसून की पारंपरिक शुरुआत का प्रतीक भी माना गया है. मछुआरे इस दौरान समुद्र से आशीर्वाद के लिए प्रार्थना करते हैं. शहर भर के लोग इस उत्सव का आनंद लेते हैं.
मछुआरे इस पर्व पर नारियल अर्पण करते समय प्रार्थना करते हैं कि वरुणदेव के रौद्ररूप से रक्षा मिले और देवता का आशीर्वाद प्राप्त हो. महाराष्ट्र के साथ-साथ दक्षिण भारत में यह त्योहार समाज का हर वर्ग अपने-अपने तरीके से मनाता है. इस दिन जनेऊ धारण अपनी जनेऊ भी बदलते हैं.
रक्षा बंधन और नारली पूर्णिमा का संबंध
धार्मिक मान्यता है कि सावन पूर्णिमा के दिन बहनें अपने भाई की लंबी उम्र की कामना करती हैं और समुद्र किनारे रहने वाले समुदाय समुद्र की कृपा के लिए प्रार्थना करते हैं. ऐसे में रक्षाबंधन और नारली पूर्णिमा की पूजा एक ही दिन होती है.